काशी में कचरे से बन रही खाद और ऊर्जा, करसड़ा प्लांट ने बनाया नया रिकॉर्ड



जुलाई में 31,940 टन कूड़े का हुआ प्रसंस्करण, जनवरी के मुकाबले 35.5% बढ़ा कचरा निस्तारण

वाराणसी | 22 अगस्त 2026

वाराणसी में कचरा प्रबंधन को लेकर नगर निगम की मुहिम अब असर दिखाने लगी है। शहर के करसड़ा स्थित वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट में कचरा प्रसंस्करण की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। जनवरी 2026 के मुकाबले जुलाई में प्लांट में कचरे के निस्तारण में करीब 35.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में जहां 23,569.8 टन कचरे का प्रसंस्करण हुआ था, वहीं जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर 31,940 टन हो गया। यानी जुलाई में करीब 3.19 करोड़ किलोग्राम कचरे को प्रोसेस किया गया।

सात महीने में करीब 1.88 लाख टन कूड़ा प्रोसेस

करसड़ा प्लांट में जनवरी से जुलाई के बीच कुल 1,87,720.5 टन कचरे का प्रसंस्करण किया गया। महीनेवार आंकड़ों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली।

जनवरी में 23,569.8 टन, फरवरी में 24,056.4 टन, मार्च में 26,272.5 टन, अप्रैल में 24,924.7 टन, मई में 28,774.8 टन और जून में 28,182.2 टन कचरे का प्रसंस्करण हुआ। जुलाई में यह बढ़कर 31,940 टन पहुंच गया।

कूड़े से तैयार हुई 50 हजार टन जैविक खाद

कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ इससे उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। नगर निगम के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में करसड़ा प्लांट से करीब 50 हजार टन कंपोस्ट खाद तैयार हुई।

तैयार खाद को विभिन्न उर्वरक कंपनियों को बिक्री के लिए भेजा गया। वहीं, कचरे से करीब 52 हजार टन RDF भी तैयार किया गया, जिसे सीमेंट फैक्ट्रियों और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

रोजाना 1000 से 1300 टन निकलता है कचरा

वाराणसी शहर में प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,300 टन ठोस कचरा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए शहर में अलग-अलग तकनीक पर आधारित प्लांट संचालित किए जा रहे हैं।

करसड़ा प्लांट में प्रतिदिन 600 मीट्रिक टन कचरा प्रोसेस करने की क्षमता है। वहीं रमना वेस्ट टू चारकोल प्लांट में करीब 600 टन कचरे के प्रसंस्करण से लगभग 200 टन कोयला तैयार करने की क्षमता है।

इसके अलावा रमना स्थित C&D प्लांट में निर्माण मलबे से ईंट और टाइल्स तैयार की जाती हैं। पहाड़िया मंडी, भवानिया पोखरी और IDH कॉलोनी के CBG प्लांटों में वेस्ट-टू-एनर्जी प्रक्रिया के जरिए करीब 500 किलोग्राम प्रतिदिन CBG उत्पादन की क्षमता है।

गीला-सूखा कचरा अलग रखना जरूरी

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने लोगों से अपील की है कि घरों और दुकानों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखें। इसके बाद कचरा सफाईकर्मियों को अलग-अलग ही सौंपें।

नगर निगम के मुताबिक स्रोत पर कचरा अलग करने से उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी होगी।

काशी में अब कचरा केवल समस्या नहीं बल्कि संसाधन में बदल रहा है। करसड़ा समेत शहर के विभिन्न प्लांटों के जरिए कूड़े से खाद, ईंधन और ऊर्जा तैयार करने की दिशा में काम तेज हुआ है।
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