Jamui: पतसंडा के काली मंदिर में श्रद्धा के साथ संपन्न हुई वार्षिक सलोनी पूजा, चंदेल राजाओं से जुड़ा है इतिहास

जमुई/बिहार (Jamui/Bihar), देसी खबर मीडिया : जमुई जिला के गिद्धौर प्रखंड अंतर्गत पतसंडा पंचायत के राजपूत टोला स्थित ऐतिहासिक काली मंदिर में मंगलवार को वार्षिक सलोनी पूजा श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। पूजा को लेकर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। पतसंडा समेत आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

1893 में गिद्धौर राज रियासत ने कराया था मंदिर का निर्माण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार मंदिर का इतिहास गिद्धौर राज रियासत से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि वर्ष 1893 में महाराजा रावणेश्वर सिंह ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। वर्ष 1923 में उनके निधन के बाद तत्कालीन महाराजा चंद्र मौलेश्वर सिंह ने मंदिर के स्वरूप में बदलाव कराया। राज परिवार की ओर से नियमित पूजा-पाठ की जिम्मेदारी पंडित हरि गौरी मिश्रा, सोमनाथ मिश्र और विश्वनाथ मिश्र को सौंपी गई थी।

‘काली मंडा’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ मंदिर

समय के साथ यह मंदिर ‘काली मंडा’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर के रखरखाव और जीर्णोद्धार का कार्य अब स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है। ग्रामीणों के प्रयास से वर्षों पुरानी पूजा परंपरा आज भी कायम है।

सावन में शुक्ल पक्ष के दौरान होती है सलोनी पूजा

मंदिर के पुजारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष सावन माह के शुक्ल पक्ष में सोमवार या मंगलवार को वार्षिक सलोनी पूजा आयोजित की जाती है। स्थानीय स्तर पर इसे ग्रामीण पूजा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस अवसर पर मां काली से सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है।

वर्षों पुरानी बलि की परंपरा भी कायम

बुजुर्ग ग्रामीणों के अनुसार वार्षिक पूजा के दौरान बकरे की बलि देने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। सलोनी पूजा को लेकर ग्रामीणों में गहरी आस्था और विश्वास है। यही वजह है कि चंदेल राजाओं के समय से जुड़ा यह प्राचीन काली मंदिर आज भी पतसंडा और आसपास के ग्रामीणों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
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