कथित सिंडिकेट से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, भोला प्रसाद और विभोर राणा समेत 17 आरोपियों की याचिकाएं खारिज
प्रयागराज | 1 सितंबर 2026
कोडीन युक्त कफ सिरप की कथित अवैध खरीद-बिक्री और सप्लाई के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने जमानत अर्जियों पर सुनवाई के बाद 17 आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि मामले में आरोपी 57 लोगों को नियमित जमानत प्रदान की।
जमानत पाने वाले आरोपियों में 17 वाराणसी जिले के बताए जा रहे हैं। वहीं मामले में कथित तौर पर अहम भूमिका निभाने वाले आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली।
भोला प्रसाद समेत 17 आरोपियों को राहत नहीं
हाईकोर्ट ने भोला प्रसाद, विभोर राणा, अंकुश सिंह और बादल आर्य समेत 17 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत के इस आदेश के बाद इन सभी आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
अवैध सप्लाई नेटवर्क का है आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक मामला कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी मात्रा में कथित अवैध खरीद, बिक्री और सप्लाई से जुड़ा है। आरोप है कि चिकित्सकीय इस्तेमाल के लिए उपलब्ध सिरप को कथित तौर पर नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल करने के लिए गैरकानूनी तरीके से डायवर्ट किया जा रहा था।
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने आरोपियों की जमानत का विरोध किया। अभियोजन ने कथित नेटवर्क में बड़े पैमाने पर लेनदेन और फर्जी बिलों के इस्तेमाल का भी हवाला दिया।
अभियोजन की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपियों से कोडीन युक्त कफ सिरप की खरीद के स्रोत और उसकी कथित अंतिम सप्लाई को लेकर पर्याप्त जानकारी सामने नहीं आई है।
बचाव पक्ष ने कहा- वैध लाइसेंस के तहत करते हैं कारोबार
आरोपियों की ओर से अदालत में कहा गया कि वे वैध लाइसेंस धारक हैं और कफ सिरप का कारोबार नियमानुसार करते रहे हैं। बचाव पक्ष ने मामले में उन्हें गलत तरीके से फंसाए जाने की दलील भी दी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अलग-अलग जमानत अर्जियों पर अपना फैसला सुनाया।
जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी
जिन आरोपियों को जमानत मिली है, उन्हें इस फैसले से मुकदमे से बरी नहीं माना जाएगा। मामले में कथित सप्लाई चैन, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच आगे जारी रहेगी। अंतिम फैसला मुकदमे के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।



