प्रेमचंद की ‘एक्ट्रेस’ ने छेड़ी नई बहस, प्रेम के साथ स्त्री की आजादी और त्याग पर हुआ मंथन


‘सुनो मैं प्रेमचंद’ में कहानी का पाठ, प्रो. श्रद्धानंद बोले- रचना में प्रेम से कहीं आगे छिपे हैं सामाजिक सवाल

वाराणसी। लमही में रविवार को प्रेमचंद के साहित्य पर केंद्रित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम में उनकी चर्चित कहानी ‘एक्ट्रेस’ के बहाने प्रेम, स्त्री की स्वतंत्रता और सामाजिक सोच पर गंभीर विमर्श हुआ। जिला प्रशासन की प्रेरणा से प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कहानी का पाठ कुसुम रानी मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम के 2028वें दिवस पर कहानी पाठ के बाद साहित्यकारों ने इसके विभिन्न पक्षों पर विचार साझा किए। पाठ के लिए कुसुम रानी मिश्रा को ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, राम सुधार सिंह, प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव और निदेशक राजीव गोंड ने सम्मानित किया।

‘एक्ट्रेस’ में प्रेम से ज्यादा बड़ा है सवाल

कहानी की समीक्षा करते हुए प्रो. श्रद्धानंद ने कहा कि प्रेमचंद की ‘एक्ट्रेस’ को केवल अभिनेत्री और रईस व्यक्ति की प्रेमकथा के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। कहानी में प्रेम, स्त्री-अस्तित्व, उम्र, सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिकता और आत्मत्याग जैसे कई महत्वपूर्ण प्रश्न एक साथ उभरते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने कहानी के माध्यम से उस सामाजिक व्यवस्था की ओर भी संकेत किया है, जहां व्यक्ति के निजी निर्णयों पर सामाजिक प्रतिष्ठा और नैतिक मान्यताओं का गहरा प्रभाव पड़ता है।

तारा के जरिए स्त्री की स्वतंत्रता पर सवाल

डॉ. राम सुधार सिंह ने कहानी के स्त्री पात्र तारा को केंद्र में रखते हुए कहा कि रचना पाठकों के सामने यह सवाल छोड़ती है कि क्या किसी स्त्री के प्रेम को महान साबित करने के लिए उसका त्याग जरूरी है?

उन्होंने कहा कि तारा अपने फैसले लेने वाली स्वतंत्र स्त्री के रूप में सामने आती है, लेकिन उसके निर्णयों पर समाज की उस सोच का प्रभाव भी दिखाई देता है, जिसमें स्त्री की उम्र और सुंदरता को उसके मूल्य से जोड़कर देखा जाता है।

प्रेमचंद को नमन कर शुरू हुआ आयोजन

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि के साथ हुआ। आयोजन में साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम में अरविंद श्रीवास्तव, राजकुमार, सत्येंद्र चौबे, सुशील श्रीवास्तव, सुखमंगलम, सुनील कुमार, नमन श्रीवास्तव, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, समीक्षा त्रिपाठी, मनोज श्रीवास्तव, विवेक विश्वकर्मा, राजेश प्रसाद और आनंद समेत कई लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन आयुषी दूबे ने किया। राजेश श्रीवास्तव ने स्वागत किया, जबकि प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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