जमुई/बिहार। सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे और बच्चों को वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है या नहीं, इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विद्यालयों के निरीक्षण का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में जिला पदाधिकारी के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी ने सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय), सतायन, जमुई का गहन निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान एसडीओ ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था के साथ-साथ वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का भी जायजा लिया। प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों से विद्यालय में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की प्रगति, पठन-पाठन की गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम से संबंधित जानकारी ली गई।
अचानक कक्षा में पहुंचे एसडीओ, बच्चों से शुरू हुआ सवाल-जवाब
निरीक्षण की खास बात यह रही कि अनुमंडल पदाधिकारी केवल विद्यालय कार्यालय या अभिलेखों की जांच तक सीमित नहीं रहे। वे सीधे कक्षाओं में पहुंचे और विद्यार्थियों से बातचीत शुरू की।
उन्होंने बच्चों से उनके विषय, पढ़ाई की स्थिति और पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल पूछे। विद्यार्थियों के जवाबों के माध्यम से उनकी विषयगत समझ को परखने का प्रयास किया गया। अधिकारियों की ओर से इस तरह सीधे विद्यार्थियों से संवाद करने से विद्यालय की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति का भी अंदाजा लगाया गया।
10वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाया भूगोल का ‘संसाधन’ अध्याय
एसडीओ ने कक्षा 10वीं में पहुंचकर विद्यार्थियों को भूगोल विषय के ‘संसाधन’ अध्याय की पढ़ाई कराई। उन्होंने विद्यार्थियों को विषय की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाते हुए सवाल-जवाब के माध्यम से उनकी भागीदारी सुनिश्चित की।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए केवल पाठ को रटने के बजाय उसके मूल विषय को समझना जरूरी है। नियमित अध्ययन, विषय की स्पष्ट समझ और निरंतर अभ्यास से विद्यार्थी अपने प्रदर्शन को बेहतर कर सकते हैं।
9वीं में ‘संविधान’ पर हुई चर्चा
इसके बाद एसडीओ ने कक्षा 9वीं के विद्यार्थियों के बीच राजनीति विज्ञान के ‘संविधान’ अध्याय पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल पूछे और उन्हें विषय को अपने दैनिक जीवन एवं समाज से जोड़कर समझने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान उन्होंने संवाद आधारित शिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि कक्षा में विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासाएं रखने और सवाल पूछने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इससे बच्चों में विषय को समझने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ता है।
पुस्तकालय से लेकर उद्यान तक की व्यवस्था पर नजर
विद्यालय भ्रमण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी ने पुस्तकालय, शौचालय, उद्यान तथा विद्यालय परिसर में उपलब्ध अन्य सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यह देखा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन किस स्थिति में उपलब्ध हैं और उनका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने विद्यालय परिसर को स्वच्छ, व्यवस्थित और विद्यार्थियों के लिए अनुकूल बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
कमजोर विद्यार्थियों पर भी रहे विशेष ध्यान
समीक्षा के दौरान एसडीओ ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कक्षा में सभी विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता समान नहीं होती। ऐसे में अपेक्षाकृत कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने की जरूरत है।
उन्होंने शिक्षकों से नियमित मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों की प्रगति पर नजर रखने और जिन विषयों में विद्यार्थी पीछे रह रहे हैं, उनमें विशेष सहायता देने को कहा।
बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए शिक्षकों को टास्क
अनुमंडल पदाधिकारी ने प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों को विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने नियमित पठन-पाठन, संवादपूर्ण शिक्षण, विद्यार्थियों की उपस्थिति, स्वच्छता और बेहतर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि विद्यालय की सफलता का वास्तविक मूल्यांकन विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, उनके व्यवहारिक ज्ञान और शैक्षणिक परिणामों से होता है। इसलिए शिक्षकों को निर्धारित पाठ्यक्रम के साथ-साथ विद्यार्थियों की समझ विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
प्रशासनिक निरीक्षण का संदेश—व्यवस्था में दिखेगा सुधार
जिला प्रशासन की ओर से किए जा रहे इस प्रकार के निरीक्षण का उद्देश्य सरकारी एवं आदर्श विद्यालयों में उपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और कमियों को समय रहते दूर करना है।
सरस्वती विद्या निकेतन, सतायन के निरीक्षण के दौरान एसडीओ द्वारा स्वयं कक्षा में जाकर बच्चों को पढ़ाने की पहल को प्रशासनिक निरीक्षण का एक अलग और प्रभावी पहलू माना जा रहा है। इससे न केवल विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद हुआ, बल्कि विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर भी मिला।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों की व्यवस्थाओं की निगरानी एवं समीक्षा आगे भी जारी रहेगी।
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