मेरठ/उत्तर प्रदेश। आम आदमी जब दवा खरीदता है तो उसके मन में एक ही विश्वास होता है कि यह दवा उसे स्वस्थ करेगी। लेकिन यदि वही दवा नकली निकले तो यह न केवल विश्वास का टूटना है, बल्कि सीधे-सीधे लोगों की सेहत और जीवन से खिलवाड़ है। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें प्रतिष्ठित कंपनी की दवा की नकली टैबलेट बनाकर बाजार में बेची जा रही थी। पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मेरठ से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत में एक कंपनी हिमालया कंपनी की प्रसिद्ध लिव-52 टैबलेट की नकली दवा तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रही थी। जांच में सामने आया कि नकली दवाओं के डिब्बे और रैपर मेरठ से तैयार करवाए जाते थे, ताकि पैकिंग बिल्कुल असली जैसी दिखे और उपभोक्ताओं को शक न हो।
मामले की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने मेरठ में छापेमारी कर मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार ये लोग नकली पैकेजिंग तैयार कर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा थे। प्राथमिक जांच में बड़े स्तर पर नकली दवाओं की आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। नकली दवाएं मरीजों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं और गंभीर बीमारियों के इलाज में बाधा बन सकती हैं। ऐसे मामलों में ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच जारी है। संबंधित दस्तावेज, मशीनरी और अन्य साक्ष्यों को भी जब्त किया गया है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जो लोग बीमारी से जूझ रहे मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर नकली दवाएं बनाते और बेचते हैं, उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि दवाएं हमेशा अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध पैकिंग या गुणवत्ता की शिकायत होने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
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