Jamui: प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को नई दिशा, डीएम की पहल पर तीन दिवसीय ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ कार्यशाला का शुभारंभ

जमुई/बिहार। जिले में प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और ऊर्जा से परिपूर्ण बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए जिला पदाधिकारी श्री नवीन (भा.प्र.से.) के नेतृत्व में तीन दिवसीय ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। स्थानीय न्यू द्वारिका विवाह भवन में आयोजित इस विशेष सत्र का उद्देश्य न केवल अधिकारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है, बल्कि उनके मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना भी है।

यह कार्यशाला पारंपरिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अलग एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ आत्मिक शांति, मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों में कार्यरत पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे एक नई सीख के रूप में आत्मसात करने की पहल की।

कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि जिला पदाधिकारी स्वयं इस कार्यशाला में सक्रिय रूप से शामिल हुए और अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ समान रूप से प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों की जटिलता और निरंतर दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य अक्सर उपेक्षित रह जाता है, जबकि एक शांत और संतुलित मन ही जनहित के कार्यों को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने में सहायक होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब अधिकारी तनावमुक्त और सकारात्मक मानसिकता के साथ कार्य करेंगे, तो इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं संवेदनशीलता बढ़ेगी।

कार्यशाला के प्रथम दिन ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के प्रशिक्षकों द्वारा अधिकारियों को सुदर्शन क्रिया, प्राणायाम एवं विभिन्न श्वास तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इन तकनीकों के माध्यम से तनाव प्रबंधन, एकाग्रता में वृद्धि और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने के उपायों पर विशेष बल दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है, जिससे कार्य के प्रति समर्पण और दक्षता दोनों में वृद्धि होती है।

इस पहल को प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल अधिकारियों के व्यक्तिगत विकास में सहायक होगा, बल्कि टीम वर्क, समन्वय और संकट की परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की क्षमता को भी मजबूत करेगा। आने वाले दिनों में इसका सकारात्मक प्रभाव जिले के विकास कार्यों और जनसेवा की गुणवत्ता में स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

जिला प्रशासन की यह पहल यह संदेश देती है कि एक सशक्त और उत्तरदायी प्रशासन के निर्माण के लिए अधिकारियों का केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका मानसिक और भावनात्मक रूप से संतुलित एवं सशक्त होना भी उतना ही आवश्यक है।
और नया पुराने