जमुई/बिहार। जिले के सुदूर एवं पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी पहल शुरू की है। जिला पदाधिकारी नवीन के नेतृत्व और मार्गदर्शन में प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने बरहट प्रखंड के दूरस्थ गांव गुरमाहा और चोरमारा का सघन दौरा कर वहां की जमीनी वास्तविकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों तथा ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं का व्यापक आकलन किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य इन इलाकों के सर्वांगीण विकास के लिए एक ठोस और व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करना है, ताकि वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों को विकास की नई दिशा मिल सके।
जिला प्रशासन द्वारा तैयार की जा रही इस विशेष विकास योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, पर्यटन और धार्मिक आस्था से जुड़े पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला पदाधिकारी लगातार उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें कर संबंधित विभागों को निर्देशित कर रहे हैं कि हर जरूरतमंद तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे। इसी क्रम में अधिकारियों की टीम को गांवों में भेजकर वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया, ताकि भविष्य की योजनाएं ग्रामीणों की अपेक्षाओं और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाई जा सकें।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि इन क्षेत्रों में शिक्षा और आधारभूत संरचना के विकास की अत्यधिक आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुरमाहा और चोरमारा में नए विद्यालय भवन निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। वहीं, बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए चोरमारा और जमुनियाटांड़ में नए आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त किसानों की सिंचाई संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए गुरमाहा और चोरमारा में अत्याधुनिक लिफ्ट इरिगेशन योजना लागू करने पर सहमति बनी, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
प्रशासनिक टीम के दौरे के दौरान ग्रामीणों के सहयोग से गुरमाहा में एक अत्यंत मनोहारी प्राकृतिक झरने की पहचान की गई, जबकि चोरमारा स्थित प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत का भी तकनीकी निरीक्षण किया गया। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि यह स्थल उनकी गहरी धार्मिक आस्था का केंद्र है और यहां उनके आराध्य ‘भट्ठा बाबा’ का वास माना जाता है। ग्रामीणों ने हिमाचल प्रदेश के मणिकरण साहिब, सीता कुंड, ऋषि कुंड तथा राजगीर कुंड की तर्ज पर इस क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग रखी। साथ ही भट्ठा बाबा के भव्य मंदिर निर्माण का अनुरोध भी अधिकारियों से किया गया।
ग्रामीणों की धार्मिक भावनाओं और जनआस्था को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इस स्थल को आगामी विकास कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। प्रशासन अब इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति के संगम स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष ब्लूप्रिंट तैयार करेगा। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की विकास योजनाएं न केवल सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाएंगी, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को भी मजबूत करेंगी। स्थानीय लोगों की सहभागिता और सहयोग से यह परियोजना पूरे क्षेत्र के लिए विकास का नया मॉडल बन सकती है।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण दौरे में जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर सिंह, सिंचाई प्रमंडल जमुई के कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. मेनका कुमारी, प्रभारी पर्यटन पदाधिकारी विकेश कुमार, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता प्रिंस कुमार, लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता मिथिलेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे।
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