जमुई/बिहार। जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शिक्षा समिति की 07 मई 2026 को आयोजित बैठक के आलोक में विभिन्न विद्यालयों में “शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। इस निर्णय को धरातल पर उतारने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी-सह-सचिव, शिक्षा समिति जमुई श्री दयाशंकर स्वयं कई विद्यालयों में पहुंचे तथा बच्चों से संवाद कर पढ़ाई और विद्यालयी गतिविधियों की जानकारी ली।
हालांकि, निरीक्षण के दौरान अधिकांश विद्यालयों में अभिभावकों की उपस्थिति बेहद कम देखने को मिली। कई विद्यालयों में तो एक भी अभिभावक मौजूद नहीं थे। शिक्षा समिति से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुछ विद्यालयों में अभिभावक अनमने ढंग से संगोष्ठी में शामिल हुए, जिनमें अधिकांश महिलाएं थीं। कई जगहों पर वर्गवार संगोष्ठी आयोजित नहीं की गई, जिससे कार्यक्रम का उद्देश्य पूरी तरह सफल होता नहीं दिखा।
वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर कुछ विद्यालयों में विद्यालय प्रधानों द्वारा व्यवस्थित तरीके से शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी आयोजित करने की तस्वीरें भी सामने आईं। इन विद्यालयों में अभिभावकों के साथ बच्चों की पढ़ाई, उपस्थिति एवं शैक्षणिक वातावरण पर चर्चा की गई।
जानकारों का मानना है कि फिलहाल अधिकांश विद्यालयों में यह पहल केवल औपचारिकता तक सीमित नजर आई, लेकिन इसकी शुरुआत को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि नियमित प्रयासों से भविष्य में इसका बेहतर परिणाम सामने आएगा।
निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालयों में सकारात्मक पहल भी देखने को मिली। खासकर महिला शिक्षिकाओं द्वारा बच्चियों से विभिन्न शैक्षणिक प्रोजेक्ट तैयार करवाकर उनमें रचनात्मकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे छात्राओं की कक्षा में रुचि बढ़ रही है तथा विद्यालयों में उपस्थिति में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
इधर, विद्यालयों की जमीनी स्थिति कई चुनौतियों की ओर भी इशारा करती है। जिले में आज भी कई ऐसे विद्यालय हैं जहां बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। वहीं मध्यान्ह भोजन योजना में गुणवत्ता की कमी भी बच्चों की घटती उपस्थिति का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। कई विद्यालयों में केवल झोर-भात परोसे जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
शिक्षा समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी ही पर्याप्त नहीं है। विद्यालय शिक्षा समिति की नियमित बैठकें भी आवश्यक हैं, ताकि बच्चों की नियमित उपस्थिति, घर पर पढ़ाई का माहौल, लर्निंग मैटेरियल, खेल सामग्री एवं विद्यालय के आधारभूत ढांचे के विकास को लेकर ठोस योजना बनाई जा सके।
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