नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) की 27 मार्च को जारी मूल्यांकन योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की सहमति प्रदान कर दी है। यह मामला उन नियमित विद्यार्थियों से जुड़ा है, जिनकी कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं पश्चिम एशिया में उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण आयोजित नहीं हो सकी थीं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने की। पीठ ने प्रभावित विद्यार्थियों द्वारा दायर याचिका पर केंद्र सरकार और सीबीएसई से विस्तृत जवाब मांगा है तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए निर्देश जारी किए हैं।
याचिका में सीबीएसई द्वारा 27 मार्च को जारी उस विशेष मूल्यांकन योजना पर सवाल उठाए गए हैं, जिसे खाड़ी देशों में अध्ययनरत उन नियमित विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया था, जिनकी बोर्ड परीक्षाएं क्षेत्रीय तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण रद्द करनी पड़ी थीं। विद्यार्थियों का कहना है कि निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया उनके शैक्षणिक हितों और निष्पक्ष मूल्यांकन के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और सीबीएसई को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद ही इस संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।
यह मामला हजारों ऐसे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है, जिनकी बोर्ड परीक्षाएं असाधारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण प्रभावित हुई थीं। अब सभी की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सीबीएसई की मूल्यांकन योजना यथावत रहेगी या उसमें किसी प्रकार का संशोधन अथवा वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाएगी।
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