Varanasi: काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रबंधन पर उठे सवाल, बनारस बार के पूर्व महामंत्री ने DM को लिखा पत्र

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद अब वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एवं अधिवक्ता नित्यानंद राय ने वाराणसी के जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती निजी कर्मचारियों के बजाय सरकारी कर्मचारियों से कराए जाने की मांग भी की है।

कर्मचारियों और ट्रस्टियों की आय की जांच की मांग
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में मांग की है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में कार्यरत कर्मचारियों एवं मंदिर प्रबंधन से जुड़े ट्रस्टियों की आय और संपत्ति की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इससे मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका को दूर किया जा सकेगा।

निजी कर्मचारियों से चढ़ावे की गिनती पर जताई आपत्ति
पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की गिनती निजी व्यक्तियों से कराई जा रही है, जो उचित व्यवस्था नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

अयोध्या प्रकरण का दिया हवाला
नित्यानंद राय ने अपने पत्र में अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों से सबक लेते हुए अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह जवाबदेह और निगरानी के दायरे में होना चाहिए।

प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि श्री काशी विश्वनाथ धाम के प्रबंधन में कुछ लोग लंबे समय से एक ही पद पर बने हुए हैं, जिन पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उनके विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता की कमी है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की अपील
पूर्व महामंत्री ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होना बेहद जरूरी है।

हालांकि, मंदिर प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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