वाराणसी। शिक्षक दिवस के मौके पर स्लम बस्ती के निःशुल्क शिक्षा केंद्र में शुक्रवार को ऐसा भावुक पल आया, जिसने हर किसी का दिल छू लिया। भारत चाइल्ड केयर फाउंडेशन के शिक्षा केंद्र में पढ़ने वाले 80 से अधिक बच्चों ने अपने शिक्षकों का तिलक और माल्यार्पण कर सम्मान किया। बच्चों ने गुरुजनों के प्रति अपनी कृतज्ञता जताते हुए शिक्षक दिवस को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता फाउंडेशन के संस्थापक एवं अधिवक्ता सुरेश प्रताप ने की। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए शिक्षा को जीवन बदलने की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि वह पेशे से वकील हैं, लेकिन इस शिक्षा केंद्र में बच्चों के बीच आकर खुद को शिक्षक मानते हैं। उनका उद्देश्य वंचित बच्चों को शिक्षा के जरिए बेहतर भविष्य का अवसर देना है।
‘गरीबी किस्मत नहीं, एक परीक्षा है’
अधिवक्ता सुरेश प्रताप ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि गरीबी को अपनी कमजोरी न समझें। मेहनत और शिक्षा के दम पर बच्चे अपनी परिस्थितियों को बदल सकते हैं। उन्होंने बच्चों को उदाहरण देते हुए कहा कि फूल कीचड़ में खिलता है और हीरा कोयले की खान से निकलता है, इसी तरह बस्ती के बच्चे भी आगे चलकर समाज के लिए मिसाल बन सकते हैं।छात्रा के एक वाक्य ने नम कर दीं आंखें
समारोह में उस समय माहौल भावुक हो गया, जब कक्षा 10 की एक छात्रा ने अपने शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए कहा, “हमारे गुरुजी ने हमें कचरा बीनने से उठाकर कलम पकड़ना सिखाया है।” छात्रा के इस कथन ने वहां मौजूद लोगों को भीतर तक झकझोर दिया।कार्यक्रम के अंत में फाउंडेशन की ओर से सभी शिक्षकों और सहयोगी दाताओं का आभार जताया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों समेत बड़ी संख्या में बच्चे और अन्य लोग मौजूद रहे।
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