हाजीपुर/बिहार। बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता आनंद मोहन सिंह के बयान ने हलचल पैदा कर दी है। हाजीपुर में क्षत्रिय समाज के एक निजी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने बिना किसी नेता का नाम लिए जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर सक्रिय कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खराब सेहत का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने पिछले तीन वर्षों में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली है।आनंद मोहन ने कहा कि एक ऐसा व्यक्ति, जो अपने राजनीतिक जीवन में कभी वार्ड पार्षद, जिला परिषद सदस्य या मुखिया का चुनाव भी अपने दम पर नहीं जीत सका, वह आज लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का मालिक बन बैठा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग पार्टी और सरकार दोनों को भीतर से कमजोर कर रहे हैं।पूर्व सांसद ने दावा किया कि JDU में ऐसे करीब 22 नेता सक्रिय हैं जिनकी न तो पार्टी की मूल विचारधारा में आस्था है और न ही नेतृत्व के प्रति कोई निष्ठा। उन्होंने इन नेताओं की तुलना चंबल के डकैतों से करते हुए कहा कि जिस प्रकार कभी चंबल में गिरोह सक्रिय रहते थे, उसी प्रकार आज राजनीतिक दलों के भीतर भी अपने-अपने सिंडिकेट और समूह बन चुके हैं।अपने संबोधन में आनंद मोहन ने दरभंगा एयरपोर्ट और प्रस्तावित AIIMS के आसपास की जमीनों का भी मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़े ट्रस्ट के नाम पर करीब 125 एकड़ जमीन का पंजीकरण कराया गया है। उनका कहना था कि सहरसा में प्रस्तावित AIIMS को दरभंगा ले जाया गया और इसके बाद आसपास की जमीनों पर प्रभावशाली लोगों की नजर पड़ गई।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AIIMS परिसर के एक भव्य प्रवेश द्वार पर लगभग 22.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए और इसके आसपास की जमीनों पर बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के कब्जे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। आनंद मोहन ने कहा कि जो काम कभी जमीन के दलाल किया करते थे, वही काम अब सत्ता के प्रभावशाली लोग कर रहे हैं।अपने परिवार के संघर्ष और राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए आनंद मोहन भावुक भी दिखे।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार हमेशा जनहित और सामाजिक संघर्षों के लिए खड़ा रहा है। एक समय उनके परिवार के पास 400 बीघा जमीन थी, लेकिन राजनीतिक संघर्ष और जनसेवा के कारण अधिकांश जमीन बेचनी पड़ी। उन्होंने कहा कि आज उनके पूर्वजों की विरासत के नाम पर बहुत कम जमीन बची है, जबकि सत्ता के करीब रहने वाले लोग अरबों की संपत्ति खड़ी कर चुके हैं।72 वर्षीय आनंद मोहन ने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें अपने परिवार और पोते-पोतियों के साथ समय बिताना चाहिए था, लेकिन लोकतंत्र और समाज के भविष्य की चिंता उन्हें लगातार सक्रिय राजनीति में बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि JDU को खड़ा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन आज पार्टी में ऐसे लोग हावी हो गए हैं जो केवल सत्ता का लाभ उठाने में लगे हैं।
आनंद मोहन के इन आरोपों के बाद बिहार की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि जिन नेताओं की ओर इशारा किया गया है, उनकी ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले ऐसे बयान बिहार की राजनीति में नए समीकरण और बहस को जन्म दे सकते हैं।
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